सामाजिक यथार्थ का प्रस्तुतीकरण और समकालीन फोटो पत्रकारिता (रघु राय की फोटो पत्रकारिता के विशेष संदर्भ में) Samajik yatharth kaa prastutikaran aur samkaleen photokarita Raghu Rai ki photo patrakarita ke vishesh sandarv men

Author: Mishra, Amit

Publication Year: 2024

Keywords: photo patrakarita

Abstract: शोध सार-

यह शोध कार्य "सामाजिक यथार्थ का प्रस्तुतीकरण और समकालीन फोटो पत्रकारिता (रघु राय की फोटो पत्रकारिता के विशेष संदर्भ में)" पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक यथार्थ के प्रस्तुतीकरण में समकालीन फोटो पत्रकारिता के संबंध में रघु राय की फोटो पत्रकारिता को समझना है। रघु राय पेशे से इंजीनियर थे, लेकिन उन्होंने फोटोग्राफी का शौक पालते हुए फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महारत हांसिल की। सन् 1966 से 'द स्टेट्समैन' में फोटोग्राफर के रूप में काम करते हुए, रघु राय ने भारतीय विविधता और जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपने कैमरे में कैद किया। रघु राय की यह यात्रा कठिन थी, परंतु उन्होंने अपने फोटोग्राफी के कौशल और समर्थन से अपने कैमरे में भारत की विविधता को बड़े ही सुंदर रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने कैमरे के माध्यम से भारत में महत्वपूर्ण घटनाओं की तस्वीरें भी ली, जैसे कि जेपी आंदोलन, बांग्लादेश के विभाजन, और भोपाल गैस त्रासदी। इन तस्वीरों में सामाजिक यथार्थ की सत्यता और समाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति की समझ प्रकट होती है।

इस शोध कार्य में हम फोटो पत्रकारिता के माध्यम से रघु राय के सामाजिक यथार्थ के प्रस्तुतीकरण को समकालीन फोटो पत्रकारिता के संदर्भ में समझने का प्रयास कर रहे हैं। इससे हमें यह जानकारी प्राप्त हुई कि फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके कार्य की समझ बहुत गहरी है। उनके द्वारा ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करके हम उनके द्वारा प्रस्तुत सामाजिक यथार्थ के महत्वपूर्ण पहलूओं को जाना है। रघु राय का जन्म १९४२ में झांग, पंजाब (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि रघु एक सरकारी सिविल इंजीनियर बनें। अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए रघु ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, लेकिन नौकरी में मन नहीं लगा। फिर वह अपने बड़े भाई एस पॉल के साथ दिल्ली में रहने लगे, वहां उन्होंने देखा कि उनके भाई और उनके दोस्त हर समय फोटोग्राफी, कैमरे और लेंस के बारे में बात करते थे। तब रघु के मन में भी तस्वीरों को लेकर अच्छे विचार थे और फिर एक दिन जब एस पॉल का दोस्त जॉय अपने गांव जा रहा था तो रघु ने कहा कि मैं भी उसके साथ जाना चाहता हूं। भाई से कैमरा मांगा और गांव चला गया। गाँव पहुँचते-पहुँचते शाम हो गई थी। रघु राय गाँव के एक छोटे गधे की तस्वीर लेना चाहता था, लेकिन वह भाग गया, रघु ने उसका पीछा किया और जब वह थककर रुक गया, तो उसने उसकी तस्वीर ले ली। जिसे बाद में लंदन टाइम्स में प्रकाशित किया गया। सबसे पहली तस्वीर लंदन टाइम्स में प्रकाशित हुई थी। रघु को यह बहुत पसंद आया और तभी से फोटोग्राफी रघु का धर्म और कर्तव्य बन गया। रघु राय का मानना है कि आजकल बच्चों में बचपन से ही प्रोग्रामिंग बिठा दी जाती है कि बड़े होकर वे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर आदि बनेंगे, लेकिन रघु का मानना है कि उनके साथ मामला अलग था। उनका न तो फोटोग्राफर बनने का कोई इरादा था और न ही फोटोग्राफर बनने का कोई दबाव था। उनका कहना है कि रचनात्मकता अनुभव और अहसास से पैदा होती है, ज्ञान से कुछ नहीं होता। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले राय ने कभी नहीं सोचा था कि वह फोटोग्राफर बनेंगे।

रघु राय ने 20 वर्षों से अधिक समय तक पत्रकारिता में काम किया और कई महान हस्तियों जैसे मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी आदि पर किताबें भी लिखीं। राय ने कई बड़ी पत्र पत्रिकाओं जैसे- स्ट्रैटमैन, संडे न्यूज पेपर, इंडिया टुडे, लंदन टाइम्स में काम किया। मैग्नीशियम फोटो आदि और बड़े समारोहों की तस्वीरें भी लीं, लेकिन रघु का मानना है कि आप बड़े लोगों की तस्वीरें तो ले सकते हैं, लेकिन आपकी संवेदनशीलता और नजरिए की परीक्षा तब होती है जब आपको रोजमर्रा की जिंदगी की तस्वीरें लेनी होती हैं। यह भी सत्य है कि भारत में अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं और अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं। उनके जीवन में ऐसा क्या है जो वे इतने उत्साह और स्वाभिमान के साथ अपना जीवन जी रहे हैं। वह लाइव फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं। इस शोध कार्य में फोटो पत्रकारिता के समसामयिक सन्दर्भ में सामाजिक यथार्थ को प्रस्तुत करने में रघु राय के योगदान को जानने का प्रयास किया गया है। रघु राय कैसे जीवन के पलों को अपने कैमरे में कैद कर पाते हैं, कैसे उनकी तस्वीरें बोलती हैं, कैसे वे समाज में घट रही घटनाओं को आवाज देते हैं। वे किस प्रकार की तस्वीरों को अपने कैमरे के योग्य मानते हैं? और उनकी फोटो पत्रकारिता यात्रा में आए उतार-चढ़ाव पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। इस शोध प्रबंध में मुख्य रूप से छह अध्याय हैं, इन सभी अध्यायों में शोध विषय से संबंधित तथ्यों पर चर्चा की गई है। इसमें उन सभी बातों का उल्लेख किया गया है जो शोध विषय से संबंधित हैं।

Guide: Sunil Kumar

University: V. B. S. Purvanchal University

Shodh Ganga Link: View Thesis

Category: Digital Media

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