Author: Anil Kumar Nigam
Publication Year: 2020
Keywords: मैगजीन पत्रकारिता, हिंदी पत्रकारिता, वैश्वीकरण
Abstract: वर्तमान दौर समाचार पत्रों व समाचार-पत्रिकाओं में पृष्ठ सज्जा से संबंधित नवीन प्रयोगों का है। महत्त्वपूर्ण खबरों को किस तरह और किन ग्राफिक्स के जरिए प्रदर्शित या प्रकाशित किया जाएगा, यह बड़े स्तर पर निश्चित किया जा रहा है।
आज महत्त्वपूर्ण यंत्रों और विशेष तकनीक के कारण जनसंचार के स्वरूप में परिवर्तन होने लगा है। आजादी के पूर्व अखबार और पत्रिकाओं के बीच विशेषताएं लगभग समान थीं। कुछ वर्ष पहले पत्रिकाओं का अर्थ सादे और सामान्य किस्म का प्रकाशन मात्र होता था लेकिन आज पत्रिकाओं के अपने डिजीटल संस्करण आ चुके हैं।
वर्तमान समय पत्रकारिता में विशेषज्ञता का है। आधुनिक तकनीक के चलते समाचार संप्रेषण और संपादन की भाषा, रंगों के संयोजन, ले-आउट एवं डिजाइन में अहम बदलाव हुए हैं। ले-आउट और डिजाइन का अर्थ प्रकाशन के पूर्व तैयार किया गया खाका अथवा उसकी झलक से है। यह अखबार अथवा पत्रिका को आकर्षक एवं प्रभावी बनाने की कला है। इसमें समाचारों, चित्रों, इन्फोग्राफ, कार्टूनों और ग्राफिक्स को इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि वे पहली नजर में ही सब कुछ कह दें। इसके प्रस्तुतिकरण में खबरों या कंटेंट के महत्त्व, प्राथमिकता, उनके चयन के कौशल, पाठक के सरोकारों को सम्मिलित किया जाता है।
वैश्वीकरण (वर्ष 1990) के बाद पिछले कुछ दशकों से पत्रिकाओं के प्रस्तुतिकरण और आकर्षण की प्रवृत्तियों के कारणों की मीमांसा आवश्यक है। ले-आउट एवं डिजाइन, समाचार संपादन और प्रिंटिंग के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की विकास यात्रा का इस संदर्भ में उल्लेख करना प्रमुख उद्देश्य है। निस्संदेह, तकनीकी क्रांति ने घटना होने के बाद उसे समाचार के रूप में प्रस्तुत करने के समय को आश्चर्यजनक रूप से अत्यंत कम कर दिया है। पत्रिकाएं अपने सुंदर ले-आउट एवं डिजाइन की वजह से ही अपने पाठकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसी क्रम में इंडिया टुडे, आउटलुक, सरिता और कादम्बिनी सहित विभिन्न पत्रिकाओं के बीच शीर्षकों, इन्फोग्राफ, तस्वीरों के डिस्प्ले, रंगों के प्रयोग, कवर पेज की साज-सज्जा पर नित नए प्रयोग करने की होड़ लगी हुई है। उदारीकरण के बाद तो यह कथन सही प्रतीत होने लगा है कि "जो दिखेगा वो बिकेगा। लेकिन दिखावे की रेस में रंगों की इस मरीचिका में कभी-कभी असली खबर गुम सी हो जाती है। पाठक सिर्फ सुंदर ले-आउट एवं डिजाइन ही नहीं बल्कि वे उसमें प्रभावशाली कंटेंट की भी अपेक्षा करते हैं।
मैगजीन की पत्रकारिता समाचार पत्र की पत्रकारिता से कई प्रकार से भिन्न है। समाचार-पत्र का पाठक अलग-अलग आयु एवं वर्ग से होता है, साथ ही यह एक क्षेत्र विशेष का भी हो सकता है। समाचार पत्र प्रतिदिन प्रकाशित होते हैं जबकि मैगजीन एक नियतकाल में ही प्रकाशित होती हैं। इसलिए पत्रिका की विषयवस्तु अधिक गंभीर, विस्तारपूर्ण और विश्लेषणात्मक होती है।
Guide: Girija Shankar Sharma and Manoj Kumar Singh
University: Mewar University
Shodh Ganga Link: View Thesis
Category: Journalism
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